Tardigrade in hindi | टार्डिग्रेड | धरती का सबसे कठोर प्राणी

दोस्तों, आपका HindiAnalysis.com में स्वागत हैं। इस धरती पर कुछ ऐसे भी जीव मौजूद है जो किसी भी विपरीत परिस्थिति में जीवित रह सकते है। ऐसा ही एक प्राणी है टार्डिग्रेड (Tardigrade)। इसे आमतौर पर water bear भी कहा जाता है। “Tardigrade in hindi” पढ़े और अधिक से अधिक लोगों को शेयर करे।

माना जाता है कि धरती के इतिहास में जीतनी भी प्रजातियां उत्पन्न हुई उनमें से करीब 99.9%  प्रजातियाँ विलुप्त हो चुकी है। धरती पर मौजूद जीतने भी जीव है, उन्हें जीने के लिए एक अलग अनुकूल वातावरण की आवश्यकता होती है। यहां पर जीवन गहरे समुन्द्र से लेकर रेगिस्तानों और बर्फीले अंटार्कटिका में मौजूद होती हैं, लेकिन इन विशेष क्षेत्रों में एक विशेष प्राणी ही जीवित रह सकता है।

अगर कुछ उदाहरण के तौर पर देखा जाए तो रेगिस्तानों पर उट, उतरी ध्रुव पर पोलर बियर, दक्षिणी ध्रुव पर पेंग्विन, मैदानी इलाकों में स्तनधारी और समुद्र में मछलियां रहती है, हालाकि इन स्थानों पर इनके अलावा भी जीवन मौजूद होती हैं।

टार्डिग्रेड (Tardigrade) कितने समय तक जीवित रह सकता है?

Tardigrade को  water bear भी कहा जाता है। इसके 1000 से भी अधिक प्रजातियों की खोज हो चुकी है। ये जीव  लगभग 30 वर्षो से भी अधिक समय तक बिना कुछ खाए पिए जिंदा रह सकता है, इस क्रम मे ये धीरे धीरे लगभग पूरी शारीरिक क्रिया को रोक देती है और सुखकर इसमे करीब 3 प्रतिशत जल की मात्रा रह जाती है। बाद मे जल और आहार मिलने पर ये फिर से क्रियाशील हो जाते है।  

हमारी धरती पर जीवन करीब 3 अरब साल पहले उत्पन्न हुई थी, उस वक्त जीवन धरती पर सूक्ष्म अवस्था में मौजूद थी। तब से लेकर आज तक धरती पर जीवों का विकास हो रहा है। वर्तमान में धरती पर जीवो की करीब 87 लाख  प्रजातियां मौजूद है जिसमें से करीब 13 लाख प्रजातियों की पहचान की गई है, बाकी के प्रजातियों का अभी भी खोज होना बाकी है।

टार्डिग्रेड (Tardigrade) कहां रहता है और इसका आकार कितना होता है?

वैसे तो टार्डिग्रेड(Tardigrade) इस धरती पर हर जगह मौजूद होते है लेकिन आकार में काफ़ी छोटा होने के कारण हमलोग इसे नंगी आंखो से नहीं देख सकते, इसे माइक्रोस्कोप की सहायता से ही देखा जा सकता है। इसका आकार 0.05 मिलीमीटर से 1.2 मिलीमीटर तक हो सकता है। आमतौर पर ये 1 मिलीमीटर से कम आकार में ही पाएं जाते है। ये धरती पर हर जगह मौजूद होते हैं लेकिन जहां पानी होता है ये वहां आसानी से रह पाते है हालांकि ये जीव किसी भी वातावरण और परिस्थिति में जीवित रह सकते हैं। शायद यही कारण है कि यह धरती का सबसे कठोर प्राणी है।

टार्डिग्रेड (Tardigrade) किस प्रकार के परिस्थिति में जीवित रह सकता हैं?

उट जिसे रेगिस्तान का जहाज कहा जाता है अगर इसे बेहद ठंढे क्षेत्रो मे भेज दिया जाए तो उसे वहाँ के वातावरण को झेल पाना मुश्किल हो जाएगा या पोलर बियर को रेगिस्तानी इलाको मे ले जाने पर वह जीवित नहीं रह पाएगा क्योकि यह इतने अधिक तापमान को नहीं झेल पाएगा।

अगर हम tardigrade की बात करे तो वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में पाया है कि ये जीव किसी भी तरह के तापमान जैसे -200 डिग्री सेल्सियस से लेकर 150 डिग्री सेल्सियस में भी जिंदा रह सकता है। इससे स्पष्ट है कि ये ध्रुवीय प्रदेशों के सबसे ठंढे क्षेत्रो से लेकर सहारा के सबसे गर्म क्षेत्रों में भी जीवित रह सकता है।

Tardigrade in hindi
Tardigrade


वैसे स्थान जहां अधिक से अधिक या न्यूनतम दबाव होता है tardigrade  वहाँ  भी survive करते है , जहां किसी भी दूसरे जीव को जीवित रहना असंभव है। इसी खूबी के कारण ये गहरे समुन्द्र में भी जीवित रहते हैं, जहां दबाव बहुत अधिक होता है। अन्तरिक्ष यात्री  space मे स्पेसशूट  पहन कर जाते है जिससे  अन्तरिक्ष के वैक्युम से उनकी रक्षा होती है लेकिन ये tardigrade बिना किसी सुरक्षा के अन्तरिक्ष मे  जीवित रह सकता हैं। 


ये उस प्रकार के रेडिएशन को भी सहन कर लेता है जिसमें किसी दूसरे जीव का जिवित रहना संभव नहीं है। अगर भविष्य मे  किसी खगोलीय पिंडों की टक्कर धरती से होती है या कोई सुपरनोवा के फलस्वरूप उससे निकलने वाले किरणों की टक्कर धरती से होती है तो उससे जो धरती पर तबाही मचेगी उस मुश्किल परिस्थिति में भी ये tardigrade जिंदा रहेगा।

चाँद पर टार्डिग्रेड कैसे पहुंचा?

Query Solved – How tardigrade reached on moon in hindi?

[फरवरी 2019] इजराइल की एक स्पेस एजेंसी  ने चंद्रमा पर एक बेरेशीट नामक मिशन को भेजा। इस मून मिशन को अप्रैल 2019 को चंद्रमा की सतह पर लैंड करना था लेकिन लैंडर चंद्रमा के परिक्रमा के बाद जब चांद के सतह पर उतर रहा था तो अंतिम क्षणों में क्रैश लैंडिंग हो गया।

Beresheet Moon mission

इस मिशन के साथ रिसर्च के लिए एक कंटेनर में हजारों tardigrade को भेजा गया था। क्रैश लैंडिंग के बाद शायद ये हजारों tardigrade चांद पर फ़ैल गए होंगे। अगर ये सूक्ष्मजीव चांद के सतह पर पहुंच गए होंगे तो ये आसानी से कई सालों तक जीवित रहेंगे क्योंकि ये चांद पर दबाव और रेडिएशन को सहने में सक्षम है। इस प्रकार से चांद को एक Alien भी मिल गया। 

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2 thoughts on “Tardigrade in hindi | टार्डिग्रेड | धरती का सबसे कठोर प्राणी”

  1. Nice!
    मुझे आज जाकर tardigrade के बारे में पूरी जानकारी मिली है। धन्यवाद।
    इंसानों ने आख़िरकार इस सूक्ष्म जीव को चांद पर भेज ही दिया।

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